मिट गई जो वतन पे सलाम उन कुर्बानियों को,
सेहरा शहादत का पहना सलाम उन जवानियों को |
जिन्हें सुन ठंडा पडा लहू भी खौल उठता है,
बाहें फडक उठें जिन्हें सुन सलाम उन कहानियों को |
तिलक कर भेजा सरहदों पर देश रक्षा खातिर सुहाग,
गर्दिश में रहने को मजबूर सलाम उन रानियों को |
खेतों में बंदूकों की फसल बो मारेंगें दुश्मन को,
हिंद की आजादी देखने वाली सलाम उन नादानियों को |
कत्लो गारत कर नरक बनाना चाहते हिंद की भूमि को,
नरक में उन्हें ही भेज रहे वीर सलाम उन सैनानियों को |
आओ हम भी वतन के नगमे लिखें सुधांशु ,
गा जिन्हें वतन की राह में चलें सलाम उन जवानियों को |
जय हिंद….

संजीव कुमार सुधांशु
गांव व डाकघर च्वाई
त. आनी जिला कुल्लू
172032..