शहीदां जो सलाम (गीत)

बिशम्बर नवीन

कारगिले च फौजियां नैं झंडा गड्डेया l
पाकेस्ताना कैसकी तूं मुंह टड्डेया ll

भाऊ लड़े लखबीर ब्रह्मू अशोक वतरा ,
शहीद होई टाल़ी दित्ता तिन्हां खतरा ;
देस्से तांइयों सौरभैं बी सिर अड्डेया l
पाकेस्ताना कैसकी ……………ll

लड़ाई किंह्यां ब्हादरां दे अग्गैं लड़नीं ,
के भाड़े देयां टट्टुआं चढ़ाई चढ़नीं ;
उआरैं आया दुसमण मुकाई छड्डेया l
पाकेस्ताना कैसकी …………ll

नीं ऐं भारती कसूर संसार बोल्लेया ,
पुट्ठपल्लड़े दा गल्ल सुणी दिल डोल्लेया ;
शरीफ़ जाइयै चीन – अमरीका डड्डेया l
पाकेस्ताना कैसकी …………….ll

शहीदां जो सलाम सौग्गी मत्था टेकणा ,
भाइयो परुआरे जो बी अप्पू देखणा ;
“नवीन” तिन्हां बैरिया खदाड़ी कड्डेया l
पाकेस्ताना कैसकी …………..ll

कारगिले च फौज़ियां नैं झंडा गड्डेया l
पाकेस्ताना कैसकी तूं मुंह टड्डेया ll

बिशम्बर नवीन
०९४१८८४६७७३
काव्य-कुंज जसूर-१७६२०१
जिला कांगड़ा,. हिमाचल।

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