?भ्रम टूटेगा ?

बाहर के गद्दारों से तो लड़ लेंगे ,
अंदर के ग़द्दार सुनहरे भेष में हैं ।
हम लड़नें का जज़्बा लिये खड़े सरहद ,
ये तो होड़ लगाये आपस रेस में हैं ।।

उम्मीदों का दीप नहीं मद्धम होगा ,
दुश्मन के चालों का अंत स्वयं होगा ।
जीत का साफ़ा फ़िर सिर अपने होगा ,
फ़ख्र है जनमें हैं तो भारत देश में हैं ।।

कहर दुश्मनों पे कुछ ऐसा बरपेगा ,
पुश्तों दर पुश्तों तक जीवन तरसेगा ।
भ्रम टूटेगा हम केवल करुणामय हैं ,
सहनशक्ति अपनीं अंतिम फेस में है ।।

? सुप्रभातम् ?
? पं अनिल?
अहमदनगर महाराष्ट्र
?8968361211

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