अहसास

कितना दर्द पियोगे
अरे कुछ झेलो तो
माना अपने अब नहीं हैं अपने
कुछ बोलो तो
उनकी याद में सही झेल लो
और कितना पियोगे
अब और नहीं।

यह दुनियाँ अपनी सी लगती है
पर अपनी है तो नही
झूठ मूठ का छलावा है
हर बार छले जाते हो तुम
दुनियाँ को संजोते संजोते
खुद को भूल गये हो तुम
अब और नह़ीं।

उन्हें पलकों पर बिठाया था तुमने
खुद को भूल कर
सीने से लगाया था तुमने
उनके लिये बस उनके लिये
खुद को मिटाया था तुमने
उनको चाहते ही रहे कयूँ
अब और नहीं।

किसी को भूल पाना आसां तो नहीं
याद रखना भी तो मुश्किल है
जहां याद है बहां जख्म भी तो है
भर पायेगा यह उम्मीद नहीं
वेशक भरे न भरे याद तो जिन्दा है
जी तो रहा हूँ जैसे तैसे, पर शायद
अब और नही।

इक टीस सी उठती है दिल में
ठीक पहले ही की तरह
तड़प उठता हूँ अनजान पीड़ा से
वेचैन सा हो जाता हूँ
न मालूम क्यूँ
बहुत सपने संजो लिये मैने
अब और नहीं।

मेरी सांसें और आँसू
साथ साथ चलते हैं
कुछ गम भी तो हैं
जो साथ ही पलते है
आज तक बहुत कोसा है मैंने
अपने बेरहम मुकद्दर को
अब और नहीं।

बहुत खाई हैं ठोकरें हमने
यहाँ इस दुनियाँ में
ठोकरों के साय में बड़े होकर देखा
पार जाने की सोची जब कभी
टूटी कश्ती ही तो हिस्से में आयी
बहुत डूवे मगर जिन्दा हैं
अब और नहीं।

निराश एसी बेवसी क्यूँ है
इतनी दूरी बता क्यूँ है
दिल दुखी है फिर धड्कता क्यूँ है
जो तुम नहीं तो याद क्यूँ है
कोई सुनता नहीं फरियाद क्यूँ है
बहुत सता लिये जिन्दगी ने
अब और नहीं।
अब और नहीं।

सुरेश भारद्वाज निराश
धौलाधार कलोनी लोअर बड़ोल
पी.ओ.दाड़ी धर्मशाला हि प्र.
176057
मो० 9418823654