गुड़िया
मेरे शहर में इक हादसा हुआ हैं
मौत तेरी हुई हैं
बलात्कार हम सबका हुआ हैं.!

मान जाओ की गुनाह हुआ हैं
अभी आग नहीँ लगी
यह तो सिर्फ धुआँ धुआँ हुआ हैं.!

मेरा आराम से सोना
दुशवार हुआ हैं
शहर का यह कैसा हाल
सरकार हुआ हैं.!
न्याय हैं भीख नहीँ
यह सबका अधिकार हुआ हैं.!

सूरज की तेज रोशनी हैं
फ़िर भी लगता हैं
तेरी आँखो में अन्धकार हुआ हैं
तुझे दिखता नहीँ तेरा
बलात्कार हुआ हैं.!
कल मैने देखा हैं
कानून का भी दाह- संस्कार हुआ हैं.!

बुझती नहीँ यह आग
मेरे आँसुओं का होना बेकार हुआ हैं
क्रोध अग्नि जला देती हैं
सिंहासनो को
जब-जब रोना बेकार हुआ हैं.!

ज़रूरत नहीँ सियासत की वेसाखीयो की
अभी नहीँ यह आंदोलन लाचार हुआ हैं.!

छोड़ दो कुर्सियां कानून और सरकार
तुम दोनो का होना बेकार हुआ हैं
मौत उसकी हुई हैं
हम सबका बलात्कार हुआ हैं
अब हम इंसान नहीँ
इंसानियत का तो बलात्कार हुआ हैं.
:- सुकृत सागर
गाँव व डाo गुलेर, जिला कांगडा
(9805467091)