ग़ज़ल
हौंसला रख कहा तो था
दर्दे -दिल सहा तो था।

रुला कर हमें वो चले गये
सकूं दिल का ढहा तो था।

जीना दूभर हो गया है
खून ज़िगर से बहा तो था।

लूटा हमको सबने मिलकर
पास मेरे कुछ रहा तो था।

मुश्किलों से घिर गये हैं
अंजाम भी सहा तो था।

रास्ते सब अवरुद्ध हो गये
वो आखरी भी गहा तो था।

मत ढूंडना मुझे अब कभी
निराश तुमको कहा तो था।

सुरेश भारद्वाज निराश
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