ग़ज़ल / संजीव सुधांशु

गजल
उनसे जुदा होने का ख्याल ही रूला देता हैै,
कैसे कटेगी जिंदगी ये सवाल डरा देता है |
प्यार किसी की जिंदगी में जगह नहीं मांगता,
ये तो दोस्तों के गमों पर हक दिला देता है |
आंखों को पढने का हुनर कुछ मैं भी सीख गया हूँ,
वर्ना वो तो आंखों में ही अशकों को छुपा देता है |
जमाने के कहने से अपने बारे में राय न बना लेना,
फितरत है इसकी यह गंगा को भी मैला बना देता है |
इन्सां को इन्सां बने रहना भी मंजूर नहीं,
प्यार तो इंसान को खुदा बना देता है |
दिल जिगर क्या जान औ’ईमान भी सौंप दिया,
भला ऐसे भी कोई प्यार में अपने को लुटा देता है |
उनका कहना ये कि हम भूल जायें उन्हें,
क्या इससे बडी भी कोई सजा देता है |
सुधांशु जहां में सिर्फ प्यार में इतनी ताकत होती है,
जो एक रानी को मीरा और गोपी को राधा बना देता है |
संजीव कुमार सुधांशु
गांव व डाकघर च्वाई
त. आनी जिला कुल्लू
172032.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *