दिल जुड़ जाये जब ..
दिल जुड़ जाये जब
धरती भी आसमां लगती है

हवा भी पानी लगती है
आग भी बरसात लगती है

आँखो का क्या काम तब
मन की आँखे तब सब देखती है

दिल के आगे सब मजबूर
में क्या तुम क्या ये जहाँ मजबूर

राजा मजबूर रंक मजबूर
नेता अभिनेता मजबूर

दिल बना ही ऐसा है
कोयला भी हीरा दिखता है

दुर भी पास दिखता है
पराये भी अपने दिखते है

अब गलती किस की है
मेरी आपकी या इस जहाँ की

सुनते तो सब दिल की है
फ़िर गुनाह किस की है

मन चंचल है सुनते है फ़िर भी
चंचल तो माँ लक्ष्मी भी है

किसी के पास बिना पूछे धन बरसती
तो किसी को तड़पा तड़पा कर धन देती है

अब कसूर वार कौन
कौन गुनाहगार है

वक्त ही बुरा है तभी मन चंचल है
वक्त जब ठीक तो फ़िर तो हलचल है

फ़िर सब ठीक दिल जो भी करे
वक्त का इंतजार करते करते हम थक गये

और दिल मन मानी करता रहा
और राम भगत दिल के साथ मजबूर होता रहा

राम भगत

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