ग़ज़ल/ मज़ा आता है
जख्म दिल के सबसे छुपाने मे मजा आता है ।
तुम देखो तो दिखाने मे मजा आता है ।।

मतले मिसरे बहुत कह लिये महफिल में ।
मक्ता तेरे नाम का सुनाने में मजा आता है ।।

बात ऐसी कोई की ही नहीं जो तुझे दर्द दे ।
पर तुम्हे नश्तर चुभाने में मजा आता है ।।

छोटी सी बात को तूने तूल दे दिया ।
तुम्हे राई का पहाड बनाने मे मजा आता है ।।

होता ही नही एहसास दर्द का दिल में ।
“दीक्षित”को दर्द सहने में मजा आता है ।।
सुदेश दीक्षित
बैजनाथ