।। हुनर से. ।।
जिसने कर लिया अवलोकन अपना,
हरगिज पूरा कर दिखायेगा सपना,
लचर ब्यवस्था जितनी भी हो,
कर जाता है हुनर से वोह काम अपना।।
बाहनेवाजी ही होती है ,
दोष यहाँ से बहाँ तक लगाना,
जिसके तरकश में तीर पड़े हों हजार,
कर जाता है हुनर से वोह काम अपना।।

चलो कर लेते हैं यह कल्पना,
ईमानदार मिले लगता है सपना,
लेकिन इसी चर्चा में देखिये, कैसे,
कर जाता है हुनर से वोह काम अपना।।

जिसका ईरादा बुलन्द होता हैं,
जानता है चक्रब्युह से निकलना,
घवराता नहीं देख भीड़ कोरवों की,
कर जाता है हुनर से वोह काम अपना।।

कलम के खिलाड़ी बहुत हैं,
जानते नहीं कब क्या है लिखना,
छुपा रूश्तम बन जाता है सब में,
कर जाता है हुनर से वोह काम अपना।।

जरूरत है आज यह सबकी,
लगाना होगा भाव अपना,
सफल हुआ खुद को पढ़ने में,
कर जाता है हुनर से वोह काम अपना।।
जग्गू नोरिया