शीर्षक (हिमाचल की विकास यात्रा)
पंद्रह अप्रैल उन्नीस सौ अड़तालीस, तीस रियासतों के पुनर्गठन से यह मेरा बना हिमाचल।
नवम्बर 1966,पंजाब के पहाड़ी भागों के पुनर्गठन से बना यह मेरा बृहद हिमाचल।
यशवंत सिंह परमार के प्रयासों से आगे बढ़ने लगा हिमाचल।
2 5 जनवरी 1971को इसे पूर्ण राज्यत्व का स्थान मिला।
तब से विकास यात्रा तीव्र हुई, और देश में हिमाचल का नाम हुआ।
पीछे मुड़कर फिर नहीं देखा इसने, आगे ही आगे बढ़ता जाता।
तब से अब तक प्रत्येक हिमाचली, विकास पथ ही के गीत है गाता।
मुख्यमंत्री वीरभद्र के नेतृत्व में, प्रदेश विकास पथ पर अग्रसर हुआ।
आगे ही आगे बढ़ता गया हिमाचल न जाने कितने काम हुए।
हर गाँव में बिजली पानी, शिक्षा और चिकित्सा में अनेकों सुधार हुए।
कोई कहीं नहीं मिलेगा अनपढ़, खेती और पर्यावरण में सुधार हुआ।
कितने गांव शहरों में बदले, नक्शा प्रदेश का तब्दील हुआ।
पर्यटन में आगे बढ़ा हिमाचल, जग में इस का नाम हुआ।
निर्धन नहीं रहा यहां कोई, भूखा नंगा नहीं यहां कोई रहा।
परिश्रमी और मिलनसार लोग यहाँ के, भिखमंगा कोई यहां नहीं दिखता।
देव देवलुओं की धरती यह है, ईश ने मानों स्वयं है इसका सृजन किया।
परिमल इसके गुण गाता है, सबने इसको बंदन और नमन किया।।
नंदकिशोर परिमल
गांव व डा. गुलेर, तह. देहरा
जिला, कांगड़ा (हि_प्र) पिन. 176033
संपर्क सूत्र, 9418187358
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