शीर्षक=हिंदी का अलख जगाना है|

सन सत्तावन से चली लडाई आज तक हम हारे हैं,
कहने को तो हम जीते हैं अँग्रेज़ों से,
पर आज भी उनकी अँग्रेज़ी के सहारे हैं|
सन सत्तावन से चली लडाई आज तक हम हारे हैं…
माँ को मम्मी,पिता को डैड
भाई को ब्रो ..
नमस्ते, राम – राम का जमाना गया,
आ गई …हाय…
हाय रे अँग्रेज़ीं और इसे बनाने वाले महात्मा..
तुमने तो कर दिया भारतीय संस्कृति का खातमां||
कहता है राहुल,
सुन लो ,
अगर भारतीय संस्कृति को बचाना है,
देश में हिंदी का अलख जगाना है||
और सही मायने में हिंदी को राष्ट्रीय भाषा का दर्जा दिलाना है|
एक नया अलख जगाना है||
एक नया अलख जगाना है||
“जय हिंद – जय हिंदी”

राहुल सुन्दन
गांव व डाकघर चुवाड़ी जिला चम्बा