छाई कैसी ये बे करारी है
हर नफ़स ज़िन्दगी पे भारी है

हर हँसी खो गई कहीं मेरी
रह गई इश्क की खुमारी है

हाल क्या है बयां करें कैसे
दिल मेरा बस तेरा पुजारी है

रूह में आके बस गये हो तुम
तुम पे ही हमने जांनिसारी है

आई ना काम कोई दुआ भी
हर बला अपने सर उत्तारी है

बुतकदा है बना मेरे दिल में
देख ले इसमें मूरत तुमारी है
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
16/5/2017
आई – 11 पंचशील नगर
नर्मदा रोड़ ( जबलपुर म,प्र, )