शीर्षक_(साथ है, विश्वास है, हो रहा विकास है)

साथ है विश्वास है हो रहा विकास है, यही लोकतंत्र का प्रकाश है।
नोटबंदी के बाद भर गया जनता में नया आत्म विश्वास है।
रिश्वत मुक्त है देश अब, जनता में खुशी का नहीं कोई पारावार है।
लोगों का, लोगों के लिए, लोगों द्वारा, भारत में शासन का यही आधार है।
जनता अब ढूंढ रही, देश का कौन कौन गुनाह गार है।
उनकी अब खैर नहीं, जगह उनकी तिहाड़ की
कारागार है।
दोनों हाथों देश को लूटने वालो, तुम्हें लाख लाख धिक्कार है।
दोनों हाथों से देश को लूटने वालो, तुम्हें लाख लाख धिक्कार है।
पैसे से जब दिल भर गया, चारा खाने का किया घोर अत्याचार है।
लोकतंत्र में जनता सबसे बड़ी, करती पांच वर्ष तक इंतजार है।
फिर दूध का दूध पानी का पानी करे, जनता सबका करती बेड़ा पार है।
देश से जो भी करे विश्वास घात, बेपर्द करो उसको अब।
परिमल ऐसे नेताओं को चुन चुन, सख्त सजा दो सब।।
नंदकिशोर परिमल, सेवा नि.प्रधानाचार्य
सत्कीर्ति निकेतन, गांव व डा. गुलेर

तहसील. देहरा, जिला. कांगड़ा (हि_प्र)
पिन. 176033, संपर्क. 9418187358