सपने
करोड़ों लोग करोड़ों सपने,
कई अपने कई अपनों के लिए देखते होंगे,
क्या कोई?
जिनके तन पे कपडे,
मुहँ में कौर नहीं,
उनके लिए सपने देखते होंगे?
क्या कोई ?
कुछ सपने उधार देंगे,
उन्हें,
जिनके,
न अपने ,
और,
न आशियाने हैं।

वीपी ठाकुर
कुल्लू