(वन संरक्षण)
वही देश महान हैं वन जिस देश की शान हैं।
सभ्यता की पहचान हैं, पर्यावरण की जान हैं।
आदिकाल से मानवता का साथ देते, आज भी देश के ये प्राण हैं।
आक्सीजन देता पीपल हमें, नीम-तुलसी आदि दवाईयों की खान हैं।
पेड़ों बिना जीवन असंभव, ये हमारा भोजन और खान पान हैं।
वन देश को समृद्ध बनाते, ये देश की आन वान और शान हैं।
मेघ इन्हीं के कारण बरसते, ईश भी इन्हीं से प्रसन्न होते।
ये वन बड़े अनमोल हैं, ये मानवता को प्राण दान देते।
कौन सा पेड़ है नहीं उपयोगी, इन्हीं के दास बने हैं योगी।
स्वास्थ्य की ये खान हैं, रूठा इन्हीं से जो बन गया वही रोगी।
आओ मिल सब पेड़ लगाएँ, वन बचाएं, प्रण लें आज यह हम सब।
परिमल पूछे अब नहीं चेतोगे तो फिर चेतोगे तुम कब!
नंदकिशोर परिमल
सेवा निवृत्त प्रधानाचार्य
सत्कीर्ति निकेतन, गांव व डा. गुलेर
तहसील. देहरा, जिला. कांगड़ा (हि_प्र)
पिन कोड 176033 संपर्क सूत्र 9418187358