व्रत
आज मेरा सुबह चाय -पत्ती लेने के लिये घर से बाहर जाना हुआ।राशन की दुकान पर 2 महिलाएं मौजूद थी ,जिन में से एक ने मास्क पहना था व दूसरी ने चुन्नी से चेहरा पूरी तरह ढका हुआ था।दोनों ही सोशल डिस्टेंस बनाये खड़ी थी। मैं भी उनके पीछे बने गोल दायरे में सोशल डिस्टेंस बनाये खड़ी हो गयी। दुकान अभी खुली नहीं थी ।उनकी बातों को सुनने लगी। मानवता,देश- प्रेम ,त्याग की भावना की ये बातें दिल के किसी कोने को छू गयी :—-

” आज व्रत है मेरा ”

“किस का व्रत ——?”

‘राशन बचाने का ‘

“क्या ? मैं समझी नहीं ”

“इस संकट की घड़ी में सप्ताह में एक बार छोटे बच्चे व बुजुर्ग को छोड़ कर सभी व्रत रखते हैं”

” व्रत रखने से राशन काफी बच जाता है।”

“हां , कोई जरूरतमंद भूखा न सोए —– यह सोच कर जरूरतमंद को राशन पहुंचाते हैं “स्वास्थ्य भी बढिया रहता है ,सेवा भी हो जाती है”

“आम के आम ,गुठलियों के दाम वाली कहावत हो गयी यह तो——”

वे दोनों बातें कर ही रही थी कि दुकानदार आ गया । पहली महिला सामान लेने में व्यस्त हो गयी व दूसरी चुपचाप वारी का इंतज़ार करने लगी और मैंने उस महिला की सोच ,त्याग ,समर्पण को दिल से ,दिल में ही सलाम किया ।तभी मुझे पता नहीं कहाँ से आवाज़ सुनाई दी—–

अगर हम समझे अपनी – अपनी जिम्मेवारी ,
तो जल्दी ही खत्म हो जाएगी covid -19 महामारी।
जय हिंद

Written by
Sunita Goyal
Retired Lecturer
Mandi Dabwali
Haryana