पोस्टमार्टम सर्टिफिकेट/विजय भरत दीक्षित

पोस्टमार्टम सर्टिफिकेट

दुर्घटना के बाद मूर्छित घायल को अस्पताल पहुंचा दिया
डॉक्टर ने प्राथमिक उपचार में झटपट इंजेक्शन लगा दिया
शीघ्रता में नब्ज देख मूर्छित को ही मृत करार दिया
कुछ देर बाद इंजेक्शन ने अपना असर दिखलाया
घायल ने पैर का अंगूठा हल्का सा हिलाया और उठ बैठा ,
प्रश्न लगा करने मैं कहां हूं ?
मैं यहां कैसे आया ?कौन मुझे यहां लाया ?
नर्स ने धीमे स्वर में समझाया कि तुम बस दुर्घटना में घायल हुए थे।
घायल अवस्था में दस मिनट पहले ही यहां लाए गए थे ।
अभी अभी डॉक्टर साहब ने तुम्हें मृत है पाया,
लेट जाओ, लेट जाओ अभी एक ही इंजेक्शन है लगाया
घायल बोला अजी मैं ठीक हूं ।
मुझे जाने दो ।
नर्स बोलीं, लेट जाओ किसी परिजन को आने दो ।
तुम्हें मृत घोषित किया है ।
डॉक्टर साहब ने यह फैसला नब्ज देखने के बाद ही किया है ।
हो सकता है, शीघ्रता में हो,
पर वह हमसे बड़े हैं,
हमसे ज्यादा पढ़े हैं ।
पढ़े लिखे व्यक्ति ने फैसला किया है ,
सोच विचार के बाद ही किया है ।
तुम क्या डॉक्टर हो?
क्या डॉक्टर से ज्यादा जानते हो ।
अपने आप को पढ़ा लिखा मानते हो,
इन्होंने MBBS ही नहीं की है ,
MD
भी कर रखी है ,
सारी पढ़ाई विदेश से झटक रखी है ।
जिद मत करो, यह आजकल के डॉक्टर हैं। तुमसे ज्यादा जानते हैं। लोग भी इन्हें अधिक पढ़ा लिखा मानते हैं। घायल मिमियाए,
मुझे घर जाना है ।
नर्स चिल्लाए ,आंसू कोई नहीं बहाना है ।
तुम्हें डॉक्टर साहब ने मृत पाया है ।
तुम्हारे ऊपर यमराज का साया है ।
तुम्हें कहीं नहीं जाना, आंसू भी नहीं बहाना। यह नर्सिंग होम है ,
समझे यहां कौन है?
नहीं चलता यहां बहाना है।
लेट जाओ, लेट जाओ कृपया डॉक्टर साहब की योग्यता पर प्रश्नचिन्ह मत लगाओ?
मरीज गिड़गिड़ाए
मैं अब ठीक हूं ।
मुझे घर जाना है ।
मुझे इलाज नहीं करवाना है ।
नर्स को गुस्सा तो आ ही रहा था, गुस्से में जोर से भन्नाई।
यदि डॉक्टर साहब आ गए तो तुम मुझे नौकरी से निकलवा दोगे ।
और तो और मालिक से डॉक्टर साहब की भी छुट्टी करवा दोगे
या प्रमोशन रुकवा दोगे।
मानती हूं कि तुम कोई भूत, प्रेत, पिशाच नहीं पर यह कोई 25 पैसे वाला सरकारी अस्पताल भी नहीं ।
तुम तो धन्य हो ,
जो सीधे यहां आए हो ।
अपने सामने अपने जनाजे में बाहर अपार जनसमूह लाए हो। मूलतः यह मूक-बधिरों का अस्पताल है ।
पर हो जाता यहां हर रोगोपचार है ।
हमारे अस्पताल के बिल की राशि सुनने के लिए बहरे भी उतावले रहते हैं।
मूक तो बिल मिलने से पहले ही स्वयं बिल की राशि पूछे जाते हैं
और यदि भूल से किसी दूसरे का बिल दिखाई दे तो कान पकड़कर खींच खींच कर हाय तौबा भी मचाते हैं ।
हमें तो सभी स्वतः ही उपचार करते नजर आते हैं ।
पर हम बोल नहीं सकते।
टांग और पैर की हड्डी टूटे मरीज के पैसे हम लोग पहले ही जमा करवाते हैं ।
क्योंकि बिल की राशि सुनते ही मरीज भागते नजर आते हैं ।
वह जो लगी ग्रेनाइट की बड़ी सी शिला है
जिस पर कुछ लिखा है। वह बताती है कि इस अस्पताल को चार ग्लोबल अवार्ड भी मिले हैं ।
हमारी विशेष तकनीक को ,
धन कमाने की मशीन को,
अधिकांश डॉक्टर अपना रहे हैं
और बिना डिग्री के झोलाछाप भी अच्छा क्लीनिक चला रहे हैं ।
आप भी अपना कैश,
कैश काउंटर पर जमा करवा दो
और साथ लगे काउंटर पर से एक बढ़िया नया
जल्दी से अपना पोस्टमार्टम सर्टिफिकेट बनवा लो ।।

रचयिता
विजयी भरत दीक्षित सुजानपुर टीहरा हिमाचल प्रदेश 96251 41 903

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