मैं और तुम/सुरेश भारद्वाज निराश

मै और’ तुम
हमने चाहा था जीना तुम्हारे लिये,
रास आया न जीना कि मौत आ गयी।

इतनी गहरी खामोशी थी हम क्या कहै
डूब जाने से पहले ही मौत आ गयी।

जख्म गहरे थे इतने कि नासूर हो गये
इनके रिसने से पहले ही मौत आ गयी।

भूल जाना तुम्हें मेरे वस मे न था
याद करने से पहले ही मौत आ गयी।

इस कद्र हमें मारा तेरी बेरुखी ने
तुझे चाहने से पहले ही मौत आ गयी।

निराश एसा जीना भी क्या है जीना,
जीने से पहले ही मौत आ गयी।

सुरेश भारद्वाज निराश😡
धौलाधार कलोनी लोअर बड़ोल
पी.ओ. दाड़ी -धर्मशाला हि.प्र.
176057
मो० 9418823654
9805385225

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *