मेरी सोच/राम भगत नेगी

मैरी सौच….
मैरी सौच मैरा विचार
मैरे अंदर का प्रकाश वैसा ही तो मैं क्यू बदलू

मैरे अपने मैरे पराये
मुझ को सब वो भाये तो मैं क्यू बदलू

रात को दिन नही हो सकता
दिन को रात नही तो मैं को बदलू

सतरंगी किरणो में प्रकाशिय कण है
मैरे अन्दर जैस भी गुण है तो मैं क्यू बदलू

भीड़ मैं रहूँ या अकेला रहूँ
खुश रहूँ या दुखी में रहूँ तो मैं क्यू बदलू

मैं हंसु या मैं रो लू
घर पर रहूँ या घर से बाहर तो मैं को बदलू

मैरी सौच मैरा विचार
मैरे अन्दर का प्रकाश वैसा ही है तो मैं क्यू बदलू

राम भगत

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