भारत माँ की बेटी हूँ/आशीष बहल

दिन प्रतिदिन बढ़ती बलात्कार की घटना के बाद एक बेटी भगवान से क्या शिकायत करती है पढ़िए ये कविता भारत माँ की बेटी हूँ डरी सी हूँ ,सहमी सी हूँ, भारत माँ की बेटी हूँ। नोच रहे हैं दरिंदे मुझको, डर डर कर मैं भाग रही हूँ।। आ जाते तब तुम कृष्ण बनकर द्रोपदी की … Continue reading भारत माँ की बेटी हूँ/आशीष बहल