बाथू की लड़ी/ नंद किशोर परिमल

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नंदकिशोर परिमल
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nkparimal17@gmail.com
Phone
9418187358
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शीर्षक (बाथू की लड़ी की टीस)
बाथू की लड़ी, पौंग बांध झील में है खड़ी।
है प्यारी बढ़ी, लगाती है प्यार की झड़ी।
पौंग बांध की सताई, बेचारी बाथू की लड़ी।
सरकार की नज़र न जाने क्यों, न इस पर अब तक पड़ी।
सैलानियों को आकर्षित करे, सदैव यह बाथू की लड़ी।
भाषा संस्कृति विभाग की दृष्टि भी, इस पर आज तक है न पड़ी
चार पांच माह पानी के बाहर रह कर, लगाए मोतियों की झड़ी।
अपनी किस्मत पर आंसू बहाती, आज यह बाथू की लड़ी।
जो पर्यटक यहां आते, बापिस नहीं कहीं जाना चाहते।
छोड़ कर यह प्यारी और न्यारी बाथू की यह लड़ी।
पौंग बांध का शिकार बन कर, देखती है यह दुख की घड़ी।
बाथू की लड़ी दूसरों का मन बहलाए, खुद उदास है यह खड़ी।
एक मंजिल इस की गिर गई, आसमान में है अकेले ही खड़ी।
बहलाए सब का मन यह, सैलानियों को बुलाए पानी में खड़ी खड़ी।
आवाज़ दिल से लगाए, बहलाने सैलानियों का मन, घड़ी दो घड़ी।
बाथू की लड़ी सुंदर बड़ी, डूब कर भी है यह तरी।
बची हुई खूबसूरती खो न जाए, खड़ी है इसलिए डरी डरी।
खेवनहार शायद कोई मिल जाए, आज भी इस आस में है यह खड़ी।
कलाकारों व शिल्पकारों के अजूबे की तस्वीर पेश करती है यह लड़ी।
पर परवाह किसको है, ध्यान देने की जरूरत है किसको क्या पड़ी।
एकबार जो यहां आकर इसका दीदार करता, दीवाना इसका होकर रह जाता।
यकायक स्वयं से बोल उठता, भई सुंदर बड़ी है, यह बाथू की लड़ी।
बद्रीविशाल जो इसके थे संग रहते, छोड़ इसको अन्यत्र हैं चले गये।
इसीलिए यह बेचैन है, अकेली, असहाय और उदास, उदास है खड़ी।
सरकार से भी निराश है, जिसने आज तक इसकी खबर न ली।
बेखबर बाथू की लड़ी, खड़ी है आज भी इस आस में ज्यों की त्यों खड़ी।
साक्षी खंडरात हैं इस बात के, अतीत में रौनक होगी यहां कितनी बड़ी।
इसीलिए निराश और हताश है, आज भी यह देखकर बाथू की लड़ी।
परिमल फोटो सहित पेश करता, दुनिया के सामने यह बाथू की लड़ी।
शायद किसी को तरस आए, और अभी भी शेष बच सके यह बाथू की लड़ी।
नंदकिशोर परिमल, सत्कीर्ति निकेतन
गांव व डा. गुलेर, तह. देहरा
जिला. कांगड़ा (हि_प्र)
पिन, 176033, संपर्क. 9418187358
Photos link https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1931102493833299&id=100008007008683

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