‘नज्म़’ ~~~
‘वादा जो किया तुमने, फिर क्यूँ निभाना भूल गये ,,?
इश्क की नैया को , साहिल पे लाना भूल गये ,,,।।

मतलब की इस दुनिया में, तन्हा जो मुझे छोड़ गये ,,,;
जियेँगे किसके सहारे, ये बताना भूल गये ,,,।।

खोये रहते हैं अक्सर, यादों में तुम्हारी जाने जाँ,,,!
सुध-बुद्ध खो बैठे हम, अपना ठिकाना भूल गये ,,,।।

यादों का बवंडर आ आ कर, रोज हमें धमकाता है,,।
सुलगता है अब तन-मन, हम हंसना-गाना भूल गये ,,।।

रहने लगे हैं खुद से, खफा-खफा अब तो ‘सावन’;
वो बन गये बेदर्दी, हमको मनाना भूल गये ,,,।।

~~~@सावन