दर्द /राम भगत नेगी

दर्द देती है जिंदगी…
कौन कहता है अपने दर्द देते है
यहाँ तो जिंदगी भी दर्द देती है

अपनों का तो दर्द देने की आदत है
पर जिंदगी तो रोज़ दर्द दे रही है

जिंदगी में दर्द ही दर्द है
किसी को माया का दर्द

किसी को साया का दर्द
किसी को काया का दर्द

किसी को अपनों का दर्द
किसी को सपनों का दर्द

बहुत दर्द है यहाँ जिंदगी में
सबने आँसुओं के सेलाब में छुपा रखा है

जो जिंदगी के दर्द को
समझ पाया वो सुकून से है

जो जिंदगी के दर्द को
समझ नहीं पाया वो बेदर्द बना है

जीओ ऐसे दर्द भी हमें
देख कर जले

दर्द भी हमें देख कर
कोसों दुर भागे

राम भगत

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