जीवन दाता/ नंद किशोर परिमल

हे जीवन दाता – हे भाग्य विधाता

हे जीवन दाता, हे भाग्य विधाता।
तेरे गुण कहां तक गाऊं, मेरी समझ में कुछ नहीं आता।
तेरे बल से धरती पर है जीवन चलता।
हर प्राणी में तूं ही जीवन के रंग है भरता।
खान पान की रचना करता, पल में किसी के प्राण को हरता।

जब चाहे किसी को अर्श पर ले जाता।
दूसरे ही पल उसे फर्श पर पटकता।
तेरी इच्छा बिन हवा का इक झोंका नहीँ चलता।

खाने को है कोई तरसता, पानी बिन है कोई मरता।

कहा भी है “समय से पहले और भाग्य से ज्यादा।
इस जग में किसी को कुछ नहीं मिलता।”

जीवन का आवागमन तुम्हारे हाथ में रहता।
जन्म मरण पर किसी का कोई जोर न चलता।
न जाने सदना कसाई सम कब किस को गूढ़ ज्ञान हो जाता।
जब जब तेरी मौज हो जाए, तो कुछ भी असंभव नहीं रह जाता। भाग्य विधाता, तूं ही सब का प्राण प्रदाता।
तेरी महिमा के गुण क्या क्या गाऊं, मेरी समझ में यह नहीं आता।

तेरी माया का भेद कोई जान न पाया।
कभी किसी को है हंसाता, दूसरे ही पल उसे रुलाता।
परिमल तेरा रहस्य न जाने कोई।
जो कुछ कोई तुझसे मांगे, वह तुझसे है तत्क्षण पाता।
हे जीवन दाता, हे भाग्य विधाता।
तेरे गुण मैं कैसे गाऊं, मेरी समझ में कुछ नहीं आता।।

नंदकिशोर परिमल
गुलेर (कांगड़ा) हि. प्र.
पिन कोड_176033
संपर्क 9418187358

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