जिसके दम पर

मोतियों को संजोने क्या निकले,
संजोते संजोते मोती सब फिसले,
फिसल गई वोह डोर हाथ से,
जिसके दम पर घर से निकले ।।

सब ओर लुटेरे कैसे करें भरोसा ,
लूटेरों में कुछेक अपने निकले,
कदम कदम पर देते आये धौखा,
जिसके दम पर घर से निकले ।।

विद्वानों संग साँझे ख्याल किये ,
कुछ समझा बहुत दिमाग से निकले,
अरमान सब उन्होंने हिला दिये,
जिसके दम पर घर से निकले ।।

बच्चों की बात करूँ तो कैसे ,
संस्कार शिक्षा सब झूठे निकले,
सबके सब बना दिये तोते जैसे,
जिसके दम पर घर से निकले ।।

सरकार की नीतियाँ बेईमान हुई,
वोट बैंक समझने बाले ही निकले,
मानवता उन हाथों से नीलाम हुई,
जिसके दम पर घर से निकले ।।

दिल कहता कुछ होसला रख,
होसले से ही योद्धा अपार निकले,
जीत होगी तेरी ,जग्गू, विश्वास रख,
जिसके दम पर घर से निकले ।।

जग्गू नोरिया
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