जरा याद करो क़ुरबानी

शहीदों की जरा याद करो कुर्बानी  ....

शहीदों की शहादत का कोई मोल नहीं लगा सकता। शहीद होने वाले सैनिक अपना सर्वसव देश पर कुर्बान करके चले जाते हैं। और शहीदों की शहादत कभी बेकार न जाये इसके लिए आवश्यक है कि हम इनकी क़ुरबानी को हमेशा याद रखें। जब जब शहीदों का जिक्र होता है आतंक का काला सांप फन उठा कर आँखों के आगे आ जाता है।
आतंक एक ऐसा जहर जो भारत को अंदर ही अंदर खोखला करने में लगा है परंतु देश के वीर सैनिकों के होते ऐसा संभव नहीं दीखता कि आतंकी अपने मनसूबों  में कामयाब हो सकें। पिछले साल के शुरू में ही पठानकोट में हुए आतंकी हमले के रूप में एक ऐसा जख्म भारत को मिला जिसका दर्द हम पूरा साल महसूस करते रहे। 2 जनवरी 2016 को पठानकोट एयरबेस पर पाकिस्तानी आतंकियों ने भारत को धरती को अपने नापाक इरादों से दशहत में डालने का प्रयास किया। आतंकी चूहों की भांति छिप कर 72 घण्टे तक पठानकोट में अपनी आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते रहे 2 जनवरी से 5 जनवरी तक चले इस आतंकी हमले में हमारे वीर जवानों ने आतंकियों को मार गिराया। परन्तु जो जख्म उन आतंकियों ने दिए शायद वो भारतवर्ष कभी भूल नहीं पायेगा। देश के 7 वीर जवान शहीद हो गए। भारत ने ऐसे वीरों को खोया जिसकी भरपाई कभी भी नहीं की जा सकती। शहीद हुए जवानों में 2 जवान हिमाचल के थे। जिसमें एक जिला कांगड़ा के शाहपुर से शहीद जवान संजीवन राणा और दूसरे जिला चम्बा के भटियात क्षेत्र के शौर्य चक्र प्राप्त शहीद जगदीश चन्द जिन्होंने बहादुरी के साथ आतंकी का सामना किया तथा उसी की राइफल से आतंकी को मार गिराया और खुद भी वीरगति को प्राप्त हो गए। पिछले साल मुझे भी शहीद जगदीश जी के परिवार से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उस समय एक बात समझ आई की देश पर शहीद होना देश के लिए जितने फक्र की बात होती है परिवार के लिए इसे स्वीकार कर पाना उतना ही मुश्किल काम। ऐसे में देशवासियों का भी फर्ज बनता है कि सैनिको को ये एहसास दिलाएं कि सैनिक का कोई एक परिवार नहीं होता पूरा देश सैनिकों का परिवार होता है। शहीद जगदीश ने तो रिटायर होने के बाद फिर से देश सेवा का प्रण ले लिया और 1 जनवरी को घर से निकले और 2 जनवरी को देश के नाम अपनी ज़िंदगी कर दी। ये बहादुरी की और देश सेवा की वो मिसाल थे जिनके बारे में सुनकर हर भारतीय के अंदर देशभक्ति की वो ज्वाला उठती है कि शहीदों को  जय हिंद कहने को हाथ खुद व खुद उठ जाएँ। शहीदों की शहादत को मोल भारत वर्ष कभी चुकता नहीं कर सकता ये वो कर्ज है जिसे हम मात्र शहीदों के परिवार को सही हक़ दिला कर ही चुकता कर सकते हैं। परन्तु दिल उस समय बहुत दुःखी होता है जब ये सुनने को मिलता है कि शहीद के परिवार अपना हक लेने के लिए इधर उधर भटक रहे हैं। शहीदों ने जो देश के लिए किया है उसे करने के जो हिम्मत चाहिए वो सब के पास नहीं हो सकती। पिछले कुछ दिनों से भटियात में शहीद के नाम पर सिहुंता  कॉलेज का नाम रखने के लिए वँहा के युवाओं ने एक मुहीम चलाई है। मेरा मानना है कि यही सबसे बेहतर तरीका है देश के शहीदों को सही सम्मान देने का जब वँहा के स्कूल और कॉलेज का नाम शहीदों के नाम पर रखा जाये। शहीदों के परिवार खुद को गौरवान्वित महसूस करेंगे और आने वाली पीढियां उनकी बहादुरी और देशभक्ति का अनुकरण करेंगी। अतः इस तरह की मांगों को सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए।
शहीद उस दीपक के समान है जिसने खुद को जला कर पूरे भारत को प्रकाशमय किया है। हम जो आज सुख की ज़िंदगी जी रहे हैं निर्भीक होकर अपने घरों में सोए हैं इसका कारण यही है कि सैनिक हिमालय के समान खड़े होकर – 50 ℃ पर भी हमारी रक्षा कर रहे हैं। वो गर्मी-सर्दी को भूल कर देश के प्रखर पहरी बने हैं। सब त्योहारों पर्वो की तिलांजलि दे कर सिर्फ देश सेवा को ही अपना धर्म मान कर दिन रात सरहद पर डटे हैं। जब गर्मी में हम ए सी की ठंडक ढूंढते हैं वो रेगिस्तान की तपती चादर ओढ़ कर देश के दुश्मनों के समक्ष खड़े रहते हैं। ऐसे सैनिकों के लिए बस इतना ही बहुत है कि हम हमेशा दिलों में उन्हें याद रखें उनकी क़ुरबानी को हमेशा याद करें। 
2016 में आतंकी हमलों ने भारत को अंदर से झकझोर कर रख दिया अगर आंकड़ो में बात करें तो 2015 के मुकाबले भारत में आतंकी हमलों में काफी इज़ाफ़ा हुआ देश के 49 जवान 2016 के आतंकी हमलों में शहीद हुए। वर्ष 2016 भारत में कई छोटे बड़े आतंकी हमले हुए जिसकी शुरुआत 2 जनवरी को पठानकोट हमले से हुई जो 3 दिन तक चलता रहा जिसमे भारतीय सेना ने 7 अनमोल जाने खो दी देश के 7 बहादुर सिपाही शहीद हुए और इसके बाद 25 जून 2016 को पम्पोर में हुए आतंकी हमले में 8 जवान शहीद हुए और 22 घायल, 5 अगस्त 2016 को असम में आतंकी हमला हुआ जिसमें असम राइफल के 14 जवान शहीद हुए । 18 सितम्बर 2016 को साल का सबसे बड़ा आतंकी हमला भारत में जम्मू के उड़ी में हुआ जिसमे सेना के 20 बहादुर जवान वीरगति को प्राप्त हुए और 8 जवान घायल हुए। परन्तु इस आतंकी हमले ने भारत के सब्र को तोड़ दिया और देशवासियों के अंदर भी पाकिस्तान की ऐसी हरकतों पर काफी गुस्सा नजर आया। सरकार की भी निद्रा टूटी और एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक कर के भारत के स्पेशल कमांडो ने उडी हमले का प्रतिशोध लिया। पाकिस्तान की सीमा में घुस कर भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तान में चल रहे आतंकी केम्पो को तहस नहस कर के सैंकड़ो पाकिस्तानी आतंकवादियों को मार गिराया।
अब आखिर प्रश्न उठता है कि हम कब तक अपने देश के जवानों को मरते हुए देखते रहेंगे। आतंक ने ऐसा तांडव मचाया है जिसका अब कोई स्थायी हल ढूंढना आवश्यक है। देश का हर नागरिक अब भारत की सरकार से पूछ रहा है कि क्या हम आज जब विकास की राह पर अग्रसर है डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया और भी कई विकास की बातें हम कर रहे हैं क्या कोई ऐसा प्रबन्ध नहीं किया जा सकता कि देश में इन आतंकियों को घुसने से रोका जा सके। अब समय आ गया है कि भारत और भी कड़े रुख को अपनाए पाकिस्तान को विश्व के सामने नंगा कर के उसे आतंकी देश घोषित कराये। मौजूदा भारत सरकार ने कई बड़े कदम पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए उठाये भी हैं। वर्तमान में नोटबन्दी को भी आतंकी गतिविधियां रोकने में एक मील का पत्थर समझा जा रहा है। आज हम सब देशवासियों को ये संकल्प लेना होगा कि हम देश के शहीदों को हमेशा याद रखेंगे उनके एहसान को हम कभी भुला नहीं सकते। जब जब शहीदों के परिवार को जरूरत हो हम हर दुःख सुख में इनका साथ दें।  ऐसे वीर जवानों के लिए हर भारतवासी को हमेशा कृतज्ञ रहना चाहिए। आओ हम ऐसे सैनिकों का वंदन करते हैं और सबसे कहते हैं कि
आओ झुक कर करें सलाम उनको जिनके हिस्से में ये मुकाम आता है, कितने खुशनसीब हैं वो खून जिनका वतन के काम आता है।
जय हिंद

आशीष बहल 
चुवाड़ी जिला चम्बा 

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