चुनावी पैंतरे. ।।
चुनावी मौसम के नजारे देखो,
नेता चरित्र नैन कजरारे देखो ।।
चार साल लिये नागिन लपेटे,
अब फन के फुंकारे देखो,।।

बडा अपमान सहा पार्टी भीतर,
विरोधी गोद में दुखियारे देखो।।

मंन्दिर मस्जिद चर्च सब प्यारे,
जूते पॉलिश करता गुरूद्वारे देखो।।

कल तक पहचाना नहीं जिसने,
बदले पैंतरे कैसे नजारे देखो।।

साही साज को दीमक चाट रही,
बजते कैसे फूटे नगाड़े देखो।।

लठ लेकर पीछे पड़े जो ,जग्गू,
मिलते गले कैसे हमारे देखो।।
जग्गू नोरिया
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