चीन में योग संस्कृति का गुरु चम्बा का युवक

चम्बा के रवि ने योग को दिलाई पहचान

रवि भारद्वाज एक ऐसा नाम जो आज किसी परिचय का मोहताज नहीं जिला चम्बा के चब गांव का ये नोजवान आज अपने बलबूते पर चीन के लोगो में भारतीय संस्कृति योग की एक अमीट छाप छोड़ रहा है। भारतीय संस्कृति और योग के प्रचार में लगा रवि आज कई युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत है। आज ब्लॉग में पढ़िए रवि के योग प्रचार और प्रसार की कहानी और अच्छी लगे तो शेयर करें।

ज़िन्दगी का सफर:-
रवि की यंहा तक पंहुचने का सफर कोई आसान नहीं रहा कई उतार चढ़ाव पार कर के आज चीन में अपना नाम कमा रहा है। अगर बात करें रवि के बचपन की तो श्री ज्ञान चंद के यंहा 1990 में इनका जन्म हुआ। एक मध्यम वर्गीय परिवार पिता सरकारी ड्राईवर और माता गृहणी एक छोटा भाई रोहित। पढाई में मध्यम स्तरीय छात्र रहे 12 वी तक की शिक्षा स्थानीय स्कूलों में पूरी की तथा उसके बाद पढाई से मन बिलकुल हट गया। और अपने गाँव व् शहर के कुछ लडको के साथ इधर उधर घूमना यही दिनचर्या बन  गयी। कुछ कमाने की नहीं सूझी तो हिमाचल की पंसदीदा जगह बद्दी सोलन का रुख कर लिया जन्हा हर बेरोजगार युवा पंहुच जाता है और मिलता कुछ भी नहीं।  1 साल तक वंहा ड्राईवरी की कई ट्रको ,गाड़ियों के साथ दिन भर घूमना रवि का एक शोक बन गया। फिर एक दिन वही हुआ जो हर किसी के जीवन में होता है और वो है बदलाव।
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पतंजलि में सीखा योग:-


 रवि के बदलाव की कहानी बनी जिला चम्बा के चुवाड़ी शहर में रवि के ताया जी श्री सुखदेव भरद्वाज के घर। बद्दी से थोड़े दिन घर वापिस जाते हुए रवि ने चुवाड़ी में रात गुजारने की सोची अपने ताया जी के घर पंहुच गया। वंहा ताया जी के लडको और रवि के बड़े भाइयों दलीप भरद्वाज और कुलदीप भरद्वाज जी ने रवि को उसके कार्य के बारे में पूछा और उसे समझाया कि ये काम मत कर इसमें भविष्य नहीं है और उस रात रवि को बहुत समझाया और उसे सलाह दी कि उसे वो लोग पतंजली में दाखिला दिलवा देते हैं और वंहा पर योग में स्नातक डिग्री कर रवि ने उनकी बातें सुनी और सुबह पतंजली जाने के लिए तैयार हो गया। रवि के बड़े भाई दलीप भरद्वाज उसे अपने साथ बाबा रामदेव जी के पतंजली योगपीठ ले गये और वंहा दाखिल करवा दिया। 2010 में पतंजली में अपनी पढ़ाई शुरू की तथा 3 साल तक पतंजली में रह कर योग के गूढ़ रहस्य को बारीकियों से भलि भांति समझा और जाना बाबा रामदेव जी का आशीर्वाद लेकर उनका शिष्य योग की शिक्षा और प्रचार के लिए वंहा से निकल आया। फिर पतंजली से निकलने के बाद भारतीय दर्शन की अमिट छाप रवि पर पड़ चुकी थी ध्येय था तो बस एक योग और संस्कृति को दुनिया तक पंहुचाने का।
चीन में गुरु:-  

आज रवि चीन में हजारों लोगो को योग संस्कृति का पाठ पढ़ा रहा है चीन के बहुत से शहरों में योग सिखाने के बाद आजकल रवि मंगोलिया के लोगो को योग का ज्ञान दे रहा है और चीन के लोगो में योग के प्रति एक अलग ही लगाव है वो अपने आप को फिट रखने के लिए योग का सहारा लेते हैं।
चीन का सफर:-
इसी संकल्प के साथ पतंजली से निकलते ही पहले गुडगाँव योगा हेल्थ केयर योगा स्टूडियो के द्वारा 1 वर्ष तक गुडगाँव के लोगो के जीवन में स्वास्थ्य का समावेश हेतु योग शिविर लगाये। तथा उसके बाद चंडीगढ़ में 1 वर्ष तक योगा अध्यापक के रूप में कार्य किया। भारत में सेवा करने के बाद 2015 में चीन का रुख किया। अपने मित्रो व गुरुओं की सलाह से चीन की योग प्रचार के लिए चुना। राह कोई आसान नहीं थी सबसे बड़ी समस्या थी भाषा की। इंग्लिश में पहले ही हाथ कमजोर और चीनी भाषा की ए बी सी भी नहीं पता। पर कहते है कि संघर्ष के बाद ही जीत कदम चूमती है उन्होंने किसी तरीके से चीनी भाषा को जाना और थोड़ा बहुत सिखा।

भारतीय संस्कृति का प्रचार:-
रवि भरद्वाज जी से जब बात की तो उन्होंने कहा कि भारत तो योग विद्या का जन्मदाता है वंहा के लोगो के खून में योग है मुझे गर्व है कि मै भारत का बेटा हूँ और योग जैसे पवित्र कार्य में लगा हूँ और मुझे मौका मिला बाहर किसी देश में जाकर सेवा करने का। यंहा चीन के लोगो में योग के प्रति बहुत रूचि है लोग व्यायाम बगेरा तो करते हैं पर प्रणायाम के अभ्यासों का यंहा कोई पता नहीं था। फिर मैंने यंहा लोगो को योग और प्रणायाम के बारे में बताया। मुझे बहुत आनंद मिलता है जब मै चीनी भाषा में लोगो को भगवान राम और भगवान शिव पार्वती की कहानियां सुनाता हूँ। वो ॐ का उच्चारण करते हैं शांति पाठ करते हैं। फिर मै उन्हें चीनी भाषा में उसका अर्थ समझा कर अपने महान ग्रंथो और महापुरुषों का व्याख्यान करता हूँ। वो लोग भारत की इस महान गाथा को सुन कर भारतीय संस्कृति के आगे नतमस्तक होते हैं बस यही आनंद की अनुभूति मुझे अंदर तक रोमांचित कर देती है। और सोचता हूँ कि मै यंह मात्र पैसे कमाने नहीं आया क्यूंकि इस क्षेत्र में वैसे भी अधिक धन नहीं पर लोगो के परमार्थ का जो धन मुझे मिल रहा है वो अद्भुत है। रवि भरद्वाज बताते हैं कि यंहा कई लोग मेरे पास आते हैं और नशा छोड़ने के लिए योग क्रियाएं सीखते है और मैंने देखा है कि उनके अंदर ऐसा परिवर्तन होता है कि वो नशा बिलकुल छोड़ देते हैं। रवि चीन के अध्यापकों को योग की कक्षाएं लगाते हैं उन्हें योग सीखा कर प्रमाण पत्र भी दिए जाते हैं फिर वंहा के कई अध्यापक अपने स्कूल के छात्रों को योग सिखाते है वंहा पर स्कुलो में योग बहुत फायदेमंद माना जाता है।
ये मात्र हमारे शरीर को स्वस्थ रखने का एक जरिया है जिसे हर कोई अपना सकता है।
रवि अभी कुछ समय और चीन में रहना चाहते हैं और फिर उसके बाद किसी अन्य देश में भी भारतीय संस्कृति का प्रचार के लिए निकल जायंगे और जीवन भर योग के प्रचार में लगे रहेंगे।
http://ashish-behal.blogspot.com/2017/03/blog-post_31.html
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चित्रकारी का शोक:- 

रवि को चित्रकारी का भी शोक है इसलिए खाली समय में वो पेंटिंग बनाते है और पेंटिंग भी आध्यात्मिक विषय पर रहती हैं।
आशीष बहल
चुवाड़ी जिला चम्बा 
हि प्र
ph 9736296410

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