चलो चम्बा अभियान से बदलेंगे चम्बा के दिन

भारत के 115 आकांक्षी जिलों में से एक चम्बा हिमाचल प्रदेश के इतिहास, भूगोल औऱ संस्कृति में अहम स्थान रखता है। चम्बा अपनी महान और प्राचीन संस्कृति के लिए जाना जाता है। चम्बा को भले ही आज पिछड़े जिलों की श्रेणी में रखा जाता है परन्तु इसका गुनाहगार चम्बा कभी नही रहा क्योंकि चम्बा ने हिमाचल के विकास में अपना अहम योगदान तब से दिया है जब से हिमाचल बजूद में आया है। कुछ राजनीतिक कारण जरूर रहे हैं जिसने चम्बा को उसका वो स्थान नही दिया जिसका चम्बा सही हकदार था। वरना 1908 में बिजली से जगमगाने वाला चम्बा, पहला क्षयरोग अस्पताल देने वाला चम्बा, हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट वाला चम्बा कभी पिछड़ता नही।

चलिए ये बातें तो गयी गुजरी हो गयी अभी समय है आगे की ओर देखने का। जिला चम्बा ने फिर से दौड़ लगाना शुरू कर दी है और यँहा के प्रशासनिक अधिकारियों ने चम्बा को पर्यटन के रास्ते विकास की राह पर लाने का नायाब तरीका ढूंढा है। आजकल सोशल मीडिया से लेकर प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर भी एक ही अभियान छाया है और वो है “चलो चम्बा”। जी हाँ, चलो चम्बा अभियान का खुमार आजकल हर युवा और छोटे बड़े पर चढ़ा हुआ है। चलो चम्बा अभियान चम्बा के पर्यटन को बढाने के लिए चम्बा जिला प्रशासन द्वारा शुरू किया गया है। इसमें चम्बा की अनछुई प्राकर्तिक सौंदर्य को दिखाती जगहों को सोशल मीडिया पर शेयर किया जाता है। ये स्थान धार्मिक और प्राकृतिककिसी भी प्रकार के हो सकते हैं। साथ ही चम्बा की प्राचीन विरासतों लक्ष्मी नारायण मंदिर, भूरी सिंह संग्रहालय, रंग महल, सूही माता, कुंजर महादेव जैसे एतिहासिक स्थलों को सोशल मीडिया पर खूब सराहा जा रहा है। चम्बा चपल को भी चलो चम्बा के तहत प्रोमोट किया जा रहा है ताकि लोकल फ़ॉर वोकल के आत्मनिर्भर अभियान को प्रोत्साहन मिल सके। बस इतना ही नही है चलो चम्बा अभियान में इसे लेकर बकायदा एक कलेंडर जारी किया गया है जिसमें हर क्षेत्र को इसमें जोड़ा गया है। सबसे अहम बात ये है कि चलो चम्बा अभियान को खेल राज्य मंत्री श्री किरण रिजूजू जी का भी समर्थन मिला है। किरण रिजिजू जी ने ट्वीट करके “रैली फ़ॉर चम्बा” का आगाज किया है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर जी ने भी चलो चम्बा अभियान को एक अभिनव प्रयास बताया है। चलो चम्बा अभियान से जँहा चम्बा सुर्खियों में आया है तो वंही चम्बा के पर्यटन को भी पंख लग रहे हैं। चम्बा में पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलें इसके लिए भी प्रशासन को तैयार रहना होगा। चम्बा की किस्मत पर बदनुमा दाग अगर कुछ है तो वो है यँहा की सड़कें शायद हम हिमाचल में सबसे ज्यादा खराब सड़को का दंश झेलते हैं जो चम्बा के पर्यटन को बढ़ने से रोकते हैं। हिमाचल प्रदेश पर्यटकों की पहली पसंद रहता है इसमें कोई शक नही। परन्तु हिमाचल अपने 4 -5 पर्यटक स्थलों तक सीमित रहा है जबकि हिमाचल के बहुत से ऐसे इलाके हैं जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। ऐसे में चम्बा के ये पहल हिमाचल को पर्यटन के क्षेत्र में कुछ नया करने का अवसर भी प्रदान करेगी। छोटे छोटे रोजगारों को लिए दरवाजे खुलेंगे तथा साथ ही व्यापार में भी इजाफा होगा। पर्यटक बढ़ने से टैक्सी बगैरा के काम भी तेजी से बढ़ने लगेंगे। अगर कुल मिला कर देखा जाए तो चलो चम्बा अभियान पूरी तरह से चम्बा के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।

ऐसा नही है कि चलो चम्बा अभियान में पर्यटन को ही बढ़ावा मिलेगा इसका स्वरूप बहुत विस्तृत है अगर आप चलो चम्बा अभियान का साल भर का कलेंडर देखें तो आप इसका अंदाजा लगा सकते हैं कि इसमें लोकल संस्कृति को भी बड़ा स्थान है। चलो चम्बा में जिले भर में होने वाली जातर मेलों को उत्सव के रूप में मनाने का कार्यक्रम है। जैसे भट्टियात उत्सव, डलहौजी उत्सव, सूही जातर, साहो जातर, पांगी की फूल यात्रा, तीसा का छिंज मेला इत्यादि पूरे साल भर चलने वाले कार्यक्रमों को चलो चम्बा में रखकर चम्बा के प्राचीन धरोहरों को भी संजोने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए बाइक रैली, कार रैली का आयोजन इस समय किया जा रहा है जिसमे जिला प्रशासन पूरी तरह से सम्मिलित है। चलो चम्बा अभियान से चम्बा के ऊपर लगे पिछड़ेपन के दाग को धोने का प्रयास किया जा रहा है और ये कई मायनों में सफल भी रहेगा। इसके साथ ही चम्बा के कई अन्य पहलुओं पर भी काम करने की आवश्यकता है जैसे शिक्षा, रोजगार, व्यापार इन सबमें भी चम्बा की छवि को सुधार कर चम्बा को देश के मानचित्र पर चमकाया जा सकता है। चम्बा में कई प्रकार के लघु उद्योग विकसित किए जा सकते हैं परन्तु ऐसा देखने की मिला है कि स्वरोजगार के रूप में जैसे अन्य जिलों में काम हुआ है चम्बा में उसका 10 प्रतिशत भी नही हो पाया। मुख्यमंत्री स्वाम्बलम्बन योजना में चम्बा में ऐसा कोई क्रांतिकारी बदलाव देखने को नही मिला जबकि अन्य जिलों में कई बेरोजगार युवकों की इससे रोजगार हासिल हुआ है। इसके अलावा चम्बा में शिक्षा को लेकर भी बड़े बदलाव की आवश्यकता है। कोई बड़े कॉलेज चम्बा में स्थापित नही हैं।अधिकतर वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल ऐसे हैं जँहा सिर्फ आर्ट्स की कक्षाएं चलती है कई सालों बाद भी विज्ञान विषय पढ़ने से छात्र बंचित रह जाते हैं। भौगोलिक स्थिति भी अनुकूल न होने के कारण अधिकतर लड़कियाँ बीच मे पढ़ाई छोड़ देती है जिसके कारण साक्षरता दर में हम पिछड़े हैं। व्यापार की दृष्टि से भी अभी बहुत कुछ करना बाकी है। चम्बा में अभी भी व्यापार का व्यापक प्रसार नही हो पाया है जिससे कि लोग अधिकतर मजदूरी का पेशा ही चुनते हैं क्योंकि कृषि यँहा भौगोलिक परिप्रेक्ष्य से करना हमेशा चुनोती रहा है। इसलिए मेरा विचार ये है कि भले ही देर से परन्तु चम्बा के लिए कुछ सकारात्मक शुरुआत अवश्य हुई है। अब चम्बा की विधानसभा क्षेत्र के नुमाइंदों को इस ओर खास ध्यान देना होगा कि उनके कार्यकाल में चम्बा का चहुमुखी विकास हो। चम्बा के हक की लड़ाई हर जगह बुलन्द करनी होगी। चलो चम्बा अभियान इस ओर बेहतरीन कदम है आओ हम सब हिमाचल वासी अपने पिछड़े भाई चम्बा को विकास की नई राह पर अग्रसर करें क्योंकि चम्बा हिमाचल की संस्कृति में मुकुट की भांति सुशोभित होता है। चम्बा के बिना हिमाचल के इतिहास, भूगोल, संस्कृति को कभी समझा नही जा सकता। चलो चम्बा जँहा हर जगह है अचंभा।

आशीष बहल
शिक्षक, लेखक कवि
चुवाड़ी जिला चम्बा
Ph 8219331727