घाटी के पत्थर बाजो

घाटी के पत्थर बाजो, होश करो कुछ होश करो।

क्यों जन्नत की घाटी को दोजख़ बनाते कुछ सोच करो।
दुश्मन के हाथों पड़कर भविष्य अपना बर्बाद करो मत।
बुराई का दामन छोड़ो, मां बाप का नाम बदनाम करो मत।

कलम के सिपाही दुबके बैठे, बंदूक के सेनानी नाहक मरते।
अपना फर्ज भूलकर वे घाटी से, क्यों अपना ध्यान हटाते।
पत्थर बाज नौजवानों, क्यों भटके जाते हो पथ से तुम?
अंदर झांक के देखो जरा, क्यों पथभ्रष्ट हुए जाते हो तुम?

जिस थाली में खाते हो, उसमें ही मत छेद करो।
भारत माता तुम्हें जगाए, होश करो, कुछ होश करो।
दुश्मन को ललकार लगाओ, अपना जीवन उज्जवल बनाओ।
भारत मां की सेवा में जुट जाओ, विकास कार्य में हाथ बंटाओ।

किस माटी के बने हो तुम, जो बुराई से बाज नहीं आते।
मां बाप के लिए बने मुसीबत, दुश्मन का क्यों हाथ बंटाते?
जिस धरती पर बढे पले तुम, उसीसे हो करते गद्दारी।
इसका कोई जवाब नहीं है, न ही इस से बढ़कर कोई मक्कारी।

यह जीवन बहुमूल्य है, इसे न तुम करो खराब।
मां बाप की अंधेरे की लकड़ी हो, उनके भी हैं अनेक ख़ब्बाब।
जान से ज्यादा प्यार से पाला, क्या तुम दोगे उन्हें जवाब?
अब तो चेतो, और मत करो जीवन अपना बर्बाद।

आतंकवादियों की मदद करके, सोचो तुम्हें क्या मिलेगा?
तुम्हारे इन कारनामों द्वारा, देशवासियों का सीना जरूर जलेगा।
बुराई का हश्र हमेशा बुरा है होता, इस बात को तुम जानो।
अपने अधिकारों और कर्तव्यों को सबसे पहले पहचानो।

छोड़ के पत्थर बाजी, सीधी राह पर आजाओ।
परिमल कहता प्यारे बच्चो, तख्ती बस्ता लेकर सीधे अपने स्कूल में जाओ।

नंदकिशोर परिमल
गुलेर (कांगड़ा) हि. प्र.
पिन – 176033
संपर्क सूत्र – 9418187358