कंधे पे हल,
हाथ में कुदाल उठाए जब कोई किसान ,
खेत की तरफ जाता है,
किसी योद्धा सा लगता है,
लड़ता है,
कभी सूखे से,
कभी अतिवृष्टि से,
संपूर्ण प्रकृति से ,
हार की सारथी ,
भी,
और जीत की सारथी ,
भी,
प्रकृति होती है,
हाथ रिसते हैं,
बदन और कपडे पसीने से भीगते है,
पसीने से लथपथ शरीर पर धूल जम जाती है,
दुनिया सुस्ताती है तपती धूप में,
किसान को समेटनी पड़ती है,
अपनी फसल उसी धूप में,

किसान की मेहनत,
और,
प्रकृति की कृपा से फसल तैयार होती है,
तब जाकर थाली में,
दाल ,सब्जी और रोटी परोसी जाती है,
क्या कहें,
तब भी कुछ लोगों को किसानों पे हंसी आती है।
नाम बोबीश पाल
गांव शाहिटा डा. कसलादी तह. भुन्तर पिन 175105
जिला कुल्लू हिमाचल प्रदेश