आओ उठें मिलकर कुछ नेक करें/जग्गू नोरिया

आओ उठें मिलकर कुछ नेक करें
विखर रहे तिनका तिनका हो कर
आओ उन्ही को मना कर एक करें।
सुना बहुत आज तक हमने
आपने भी सुना है कि
मजहव नहीँ सिखाता
आपस में बैर रखना
पर दुख होता है यह देख कर
हमले होते और
मजहबी कहीं निकल आते
जुट जाते रंग मजहव का लगाने
देश पर।
ऐसा क्यूँ होता कैसे होता कौन करता
बैठ कहीं विचार विमर्श करें
टूट रहे हैं रिश्ते उन्हें एक करैं।।
लाख यत्न कर लें कोई
करना जो चाहता है
धर्म से बडा मानवता का नाता है
पले बडे हैं यही सब देख कर
मानवता और धर्म का विलय हो
नेक काज है करने में न देर कर
सब संतानें उस मालिक की
रंग रूप बेश भूसा देख न भेद कर।
मति किसकी कैसे पथ भ्रष्ट हूई है
इस पर भी गौर करता चल
तुमसे ही उम्मीद जगी है
मत टाल बात कतई कल पर
टूटे जिनके सपने वीच मझदार में
हो पायें पुर्ण सपने विचार करें
आओ इस कडी में कदम तेज करें।।

जग्गू नौरिया।।

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