राम भगत नेगी जी की हिंदी कविताएँ

अकेले यात्री है

अकेले यात्री है
हम इस दुनियां के
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अकेला आया हूँ
अकेला ही जाऊंगा
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पर मातृभूमि माँ बाप
अपने पराये का प्यार नहीं भूल पाऊँगा
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ना में सलमान
ना शाहरुख खान
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में तो राम भगत
खुद का ही हूँ मैं अभिमान
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दुःख सुख का खुद ही साथी
साथ में है प्यारी जीवन साथी
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जाना तो एक दिन
दुनियां से मुझे भी
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कोई हँसेगा कोई रोयेगा
बस इतना ही मैरी कहानी तब होगा
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अकेले यात्री है
हम इस दुनियां के
***
मौलिक अप्रकाशित
राम भगत किन्नौर
9816832143

अमीर कौन

दौलत का होना ही
अमीर नहीं कहलाता
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अमीर वह है जो इस शरीर से
मैं शब्द को निकालता है
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अमीर वह है जो अपने मन से
लोभ मोह क्रोध को निकालता है
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संसार में सब को एक जैसा समझता हो
अहिंसा निंदा छोटे बड़े का भेद भाव ना रखता हो
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पूरे भ्रमाण्ड में प्रभु का ही वास है
हर प्राणी में प्रभु का वास है
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अपने आप को पहचानों
इस दिल से मैं शब्द जो मैल से भी मैला है
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निकाल कर फेंक डालो
आप करोड़पति से भी बढ़कर हो
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मौलिक अप्रकाशित
राम भगत किन्नौर

बदलते रिश्ते

बदलते है
रिश्ते वक्त के साथ
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अपने लिऐ अपनों के लिऐ
जीने के लिऐ पाने के लिऐ
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रिश्ते बदलते है
मौसम की तरह
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कौन है यहां वक्त में
वक्त के साथ सब बदलते है
***
मैं कौन तुम कौन
रिश्ते बदलते है जब
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रह जाती है सिर्फ तन्हाईयां
और कुछ निशानियां
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जो बताती है
कभी थी रिश्तों में मजबूतीयां
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वक्त के साथ रिश्ते बिखर जाते है
टूट कर दर्द बन जाती है
***
रह जाती है सिर्फ यादें
और कुछ मुलाकत की बातें
***

मौलिक अप्रकाशित
राम भगत किन्नौर
98168432143

मत करो तंग किसी को

मत करो तंग किसी को
मत बोलो नाजायज़ किसी को

सब के अपने सपनें होते है
बोलने समझाने से यहां कौन अपने होते है

सब खिलाड़ी है यहां
सब खेलते है दिल से मन से जज्बातों से

जीतते है यहां वो
जो नियम संयम से बाहर जा कर धोखे से

कौन है जो खुद को समझे
दूसरों को समझे

समय कहां किसी के पास
जब समय था खेलते थे दिल से दिल की बात

आज समय नहीं तो
कहते कौन हो आप और क्या है जात

मत तंग करो उनको
जो कहते है

मैं कौन आप कौन
तेरा मैरा पहचाना कौन

मत तंग कर किसी को
मत तंग कर किसी को

मौलिक अप्रकाशित
राम भगत किन्नौर
9816832143

जरूरी नहीं है

जरूरी नहीं है
कोई जीवन भर साथ दें

दुनियां की रीत है
किसी की हार तो किसी की जीत है

आज भी इंसान बेबस और लाचार है
कोई निडर तो कोई सदाचार है

बहुत झमेले है दुनियां में
रंग बिरंगे मेले है दुनियां में

कोई खुद को बनाता है
कोई खुद को मिटता है

कोई साथ देता है
कोई वक्त में साथ छोड़ता है

जरूरी नहीं है
कोई जीवन भर साथ दें

यहां जब दिल मिलते
तब सब अपने

यहां जब दिल टूटते है
तब वक्त में सब बेगाने

जरूरी नहीं है
कोई जीवन भर साथ दें

मौलिक अप्रकाशित
राम भगत किन्नौर
9816832143

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