जिसकी चलती उसकी क्या गलती/राम भगत नेगी

जिसकी चलती उसकी क्या गलती

जिस की चलती
उसकी क्या गलती

ये रीत बनी
तो रहेगी चलती

जहा जाओ अपनो
का बोल बाला

जिसकी चलती
उसका क्या होने वाला

क्या सरकारी क्या ठेकेदारी
जिसकी चलती उस की सरदारी

मज़बूर बेबस तो
अपनी बारी का इंतजार करता

जब उसकी चलती नहीं
तो और क्या करता

यंहा नंबर मिलते है
नंबर मिटते है

वो चाबी समझ नहीं आई
जंहा चलती बईमानों की कमाई

जिस की चलती उसकी क्या गलती

मौलिक अप्रकाशित
राम भगत किन्नौर

भूल गये क्या

क्या खता हमसे हुई है
यूँ अचानक आज भूल गये

चांदनी रात हो या बरसात की रातें
ढ़ेर सारे की थी कभी हमने बातें

पल दो पल में ही आज हम अन्जान हुवे
हमारे दूर जाते ही तुम गुमनाम हुवे

बताओ ऐसी क्या बात हुई
अधूरी मुलाकात की ये खता हुई

ये जिंदगी की रीत है
यादों की बरसात फिर कभी लौट कर नहीं आती

तुमसे बिछुड कर दिल बहुत रोया
आज पता चला दिल है मैंने खोया

तेरे बिना ये जग सुना सुना लगता है
जिस्म से रूह जुदा जुदा सा लगता है

तुम भूल जाओ कोई नहीं गम
क्या खता हुई ये बताओ तुम

राम भगत आज भी तुम्हारा है
मैरे दिल ने तुम्हें ही पुकारा है

क्या खता हमसे हुई है
यूँ अचानक आज भूल गये

मौलिक अप्रकाशित
राम भगत किन्नौर

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