कोई दिलदार नहीं कोई यार नहीं

कुछ तो कहो टूटा है कुछ कहीं पर
या सिर्फ बिखरा है कुछ

ये आसमान और तारे
क्यों आज ज़मीं पर आ गये

उम्मीद हमें ना थी ऐसी उनसे
वो इस कदर टूट जायेंगे बिखर जायेंगे

करते थे जो दिल की बात
आज की ऐसी सियासत

उम्मीद का खून पीकर
ऊंची उड़ान वो कर बैठे

ना देखो कोई ऊंची ख्वाब
बोझ बढ़ जाती है

लूट डाली हसीन ख्वाब
जो आज तक संजोये रखा था

हो गया पराया एक दम उसकी निगाहों से
आज अपनी ही सरज़मीं पर अकेला रह गया

पत्थर के इस शहर में आज पता चला
कोई दिल दार नहीं कोई यार नहीं

मौलिक अप्रकाशित
राम भगत किन्नौर
9428232143

एक आशियाना तो बनाओ हमारे लिये

एक आशियाना तो बनाओ हमारे लिये !
यूं बेसहारा ना छोडो आशियाना बनाओ हमारे लिये !
जब तक स्वस्थ थे दुध दही से परिवार तूने पाला !
गोबर मूत्र से तूने अपना बगिया सवारा !
मेरे ही वंश से अब तक तेरा संसार चले !
असमर्थ हूँ अब कुछ नहीं दे सकती तो तुम जंगल में छोड़ चले !
बेसहारा है हम इंसान के हेवानीय्त देखो !
गाड़ी बँगला वालों गौर से देखो !
खाने को नही तो रहने को नहीं !
भीगी बरसात में हमें सर ड्कने को नहीं !
हो शर्म लाज अभी तुम सबको !
एक आशियाना बनाओ हम सबको !
ॐ शांति
कृपा अवारे पशुओं को एक आशियाना बनाये हम सब मिल कर बनाये..

हम जहां कहीं जाते है ..
हम जहां कहीं भी जाते है
कुछ ना कुछ छिपा होता है उन वादियों में

बस हमें देखने की जरुत होती है
वादियों को दिलों को

हरी भरी प्रकृति में बसा है सब का प्यार
पशु पक्षी और हर प्राणी का घर संसार

लौट आते है हम कुछ तोड़ कर
कली और फूल को मसल कर

निर्दयी होते है कोई तो कोई दीनदयाल
कोई प्रकृति को करें बर्बाद तो कोई रखें ख्याल

हम जहां कहीं भी जाते है
कुछ ना कुछ छिपा होता है उन वादियों में

मौलिक अप्रकाशित
राम भगत किन्नौर
9418232143