यादें

यादें
याद दिलाती है
याद तेरी जब भी आती है
यादों के अश्रु फिर से गिर जाते है

भूल
भूल नहीं सकता वो यादें
भूल गये क्या तुम मेरे प्यार को
भूल से फिर ना लौटूंगा तेरी जिंदगी में


आ अब लौट आ
आ फिर से रौनक दिल में जगह
आ फिर से आ कर सारे गम मेरे मिटा

तेरी
तेरी रुसवाई से दर्द हुवा है
तेरी बेरुखी से मन में एक कुंठा है
तेरी चाहत है ये या प्यार का दिखवा

मौलिक अप्रकाशित
राम भगत किन्नौर

चौखट में बैठी है शाम

चौखट में बैठी है शाम
बोलो राम जय जय राम

सांझ जब ढले
खेत खलियान से हम चले

सिर पर थोड़ी सुखी लकड़ी
दोस्तों संग पकड़ा पकड़ी

हम जब चले
घोड़ा गाड़ी और पेदल चले

प्यास से जब सूखा गला
दही छाछ से भरा प्याला

पीकर सब मस्त हुवे
ठंडी ठंडी आह से सब पस्त हुवे

चौखट में बैठी है शाम
बोलो राम जय जय राम

दादी की लोरी
दादा की हुक्का चोरी

सब को था बहुत गुमान
आज वो सारा प्यार बना शमशान

मोबाइल इंटरनेट में सभी व्यस्त
घर के कोने कोने अब सिगनल से अस्त व्यस्त

चौखट में बैठी वो शाम
अब नेट में व्यस्त बोलो राम जय जय राम

वो जब रूट जाते है

वो रूठ जाते है जब
वक्त लग जाते है मुझे मनाने में

हर खुशी फीकी पड़ती है तब
वो रूठ जाते है जब

इदर उदर फिरता हूँ
रोज उसे मनाने में

कैसे समझाऊं अब उसे
जमाना इस कदर पीछे पड़ा है

हर खामोशी टूट कर बिखर जाती है तब
वो रूठ जाते है इस कदर जब

कोई समझाये उसे जा कर
दिल को दर्द बहुत होता है

इस कदर रोज रूठ जाने से
सांसे अटक जाती है तब

वो रूठ जाते है जब
वक्त लग जाते है मुझे मनाने में

मौलिक अप्रकाशित
राम भगत किन्नौर
9816832143