इन्सानियत बिक रही है/संजीव सुधांशु

गजल

इन्सानियत बिक रही है बाजारों में,
सनसनी बिक रही है अखबारों में|
बेहाल है किसान और मजदूर,
तरक्की हो रही है इश्तिहारों में |
उनके आने से गुलज़ार हुआ आंगन,
जो न हुआ था अब तक की बहारों में|
कुछ बेटियाँ कोख में दफन कर दी गईं,
सुना है अबसे फूल नहीं खिलेंगे बहारों में |
देखते रहे तमाशा खडे हो उसकी
मौत का,
नाम उनका भी होगा उसके हत्यारों में |
जरूर कुछ गुल खिलाये हो सुधांशु,
तभी तो चर्चे होने लगे हैं बाजारों में |

संजीव कुमार सुधांशु
गांव व डा. च्वाई त. आनी जिला कुल्लू…. 172032
फोन.. 94182-72564

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