आतंकवाद / विक्रम कौशल

विषय- आतंकवाद

                      

भय और अन्याय का जो संवाद है।

धर्म और एकाकी विचारधारा का जो विवाद है।

खंडित हो रहा जिससे विश्व शांति का अनुवाद है।

तुम जान लो वही प्राणीमात्र इस धरा पर आतंकवाद है।

                       

दृष्टि नही दृष्टिकोण अलग है।

जन सृजन से भिन्न यह कोण अलग है।

संकुचित विचारों की सार्थकता को सिद्ध करना जिनका वंशवाद है।

तुम जान लो वही प्राणीमात्र इस धरा पर आतंकवाद है।

भेदभाव का हलाहल बहता सदा जिनके शोणित में है।

नरसंहार जैसा कुकृत्य सदा जिनके बुधित्व में है।

जो मानव ही मानवता के अस्तित्व का विनाशवाद हैं।

तुम जान लो वही प्राणीमात्र इस धरा पर आतंकवाद है।

विक्रम कौशल

उत्तर प्रदेश 

जिला- गोण्डा

विषय-सफरनामा

सफ़र हमेशा मंजिल से खूबसूरत होती है।

मंजिलें तो हम सभी तय करतें हैं और कभी कभी तो ये एक जैसी भी हो सकती हैं पर जो रास्ता हम उस मंजिल तक पहुचनें में तय करते हैं वो कितनी जाजिब यानि आकर्षक है ये बहुत मायने रखती है क्योकि सफ़र जितनी अर्जमन्द यानि महान होगी उतना ही दूसरों के लिए मिशाल बनेगी।

जिंदगी तो हम सभी के पास है पर जिंदगी जी कैसे जाये ये बहुत कम लोगो को मुनासिब है और जो इस बात से वाकिफ है असल में उन्ही की दुनिया कायल है

कि कुछ वक्त मुनासिब हुआ है मुसाफिर 

चल कुछ हंस लें कुछ रो लें 

इफ़्तिख़ार हो तेरे सफरनामे की 

यादों के कुछ ऐसे बीज बो लें।

जो गुजर रहा हूँ इन लम्हों में मैं हूँ तेरा सफरनामा 

गुजुरूँगा जो आगे भी तो कहलाऊँगा तेरा सफरनामा

कुछ खट्टे कुछ मीठे यादों में गुनगुनाउंगा

तैरुंगा आसुंओं में भी और हंसी के झरनों में भी नहाऊंगा 

रंग-रूप की क्या बात करूँ जैसे

किसी बर्तन में रक्खे पानी की तरह मेरा जामा 

जो गुजर रहा हूँ इन लम्हों में…….1

कोरे कागज जैसी मेरे हाथों की सजावट है,

खिंच जाता हूँ वैसी लकीरों में जैसे जिसकी लिखावट है।

शख्शियत यूँ जुड़ जाती है मुझसे ये है मेरा कारनामा

जो गुजर रहा हूँ……….……2

कहीं अधूरी रह जाने वाली ख्वाहिस हूँ 

तो कही कायम हो जाने वाली दास्ताँ हूँ

कलम जो चल जाये कातिब की मुझ पर,

तो दूसरों के लिए बनने वाला रास्ता हूँ।

यादों के इस कारवां में ये है मेरा बैनामा 

जो गुजर रहा हूँ……………….3

गुफ़्तुगू हमेशा तेरे सफ़र की होगी,

मंजिलें तो कइयों की एक सी हैं,

खुबसूरत बन सके सफ़र जो तेरा,

कहानी वही सबसे अलग सी होगी।

बस इतनी सी ख्वाहिश है मुसाफिर, जिंदगी को ऐसे जी की बन सके यादों का तेरे सफरनामा 

जो गुजर रहा हूँ इन लम्हों में मैं हूँ तेरा सफरनामा।

विक्रम कौशल

गोण्डा उत्तर प्रदेश

9891053177

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