तुम बचा लेते

उन दुपट्टों पर सज़्दा कर नमाज़ निभा लेते।
कोई दूसरा करता तार तार तुम बचा लेते।।

फरिश्ते नूर कर देते मान लो यक़ीनन ये।
अगर दबोच कर दरिंदों को तुम सजा देते।।

सितारे फलक से उतर कर बैठ जाते झोली में।
अगर बेलगाम दिल को अपने नहीं हवा देते।।

ज़मीन फट जाये जमीँदोज़ हो जायें क्या लड़कियाँ।
पाँव बहकने से पहले घर के लड़के समझा देते।।

बाहरी रंग से जता दिया हैं इबादत वाले हम।
काश ये रंग इबादत का ज़ेहन में भी चढ़ा लेते।।

पंडित अनिल

कौन सा रिश्ता

कौन सा रिश्ता यहाँ का साथ हमारे तुम्हारे ऊपर जायेगा।
चुन लेगा जमाना तिनका तिनका यूँ अगर बिखर जायेगा।।

ज़िंदा रहेंगे अल्फ़ाज गीत संगीत सब तेरे।
कौन कहता कि तूँ बेनाम ही मर जायेगा।।

ज़िंदगी में बहुत से मक़ाम आयेंगे जायेंगे रुकना मत।
मंज़िल बे नसीब हो जायेगी ग़र कहीं पे ठहर जायेगा।।

नफ़रतों की बाड़ हर तरफ़ लगा रख्खी है भाई।
बता तूँ ही किधर से निकल कर अपने घर जायेगा।।

पंडित अनिल

परिवार’ एक स्नेह की सरिता’/निशा कान्त द्विवेदी

उमड़ घुमड़ कर बादल/कुलभूषण व्यास