कौन लिखता है/जग्गू नोरिया

कौन लिखता है

कौन लिखता है
सब को चाहिये रुपए
खरा खोटा किसे दिखता है ।
सब को चाहिये पेट भर रोटी
जाने बिन अट्टा केसे पिसता है ।
लालच में ढूब गई मानबता यूँ
भूल गये खून का भी कोई रिश्ता है ।
लिखे आर टी आई जब समाजसेवी
अफसर कहाँ कुर्सी पर टिकता है ।
हरामी की औलाद होती है जो
कर्मचारी दफ्तर में वही विकता है ।
समाजसेवक बने क्रान्तिकारी जब कोई
न्याय दिलाये बिन कहाँ वोह रुकता है ।
ठाना हो जिसने लोगों के लिए लड़ना
षड़यन्त्रों से कभी वोह नहीं झुकता है ।
बाहरी भाव तो एसे पाल लिए
हर कोई कहे वोह नेक फरिश्ता है ।
करनी जब जानी दर दर जा उसकी
तब जाना वोह तो पैसे लेकर लिखता है ।।

जग्गू नोरिया

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