अहसास
कभी कभी एसा होता है
नमी आँख में दिल रोता है
साथ छोड दें जब अपने भी
कौन किसी का तब होता है
नमी आँख में दिल रोता है

संग किसी के चलना क्या
देख किसी को बदलना क्या
सोचे क्यूँ अबकी-कल की
संग बुराई मन धोता है
नमी आँख में दिल रोता है

संग सहारे दूर हो गये
पता नहीं क्यूँ मजबूर हो गये
नींद कहे नहीं आती मुझको
फिर भी जाने क्यूँ सोता है
नमीं आँख में दिल रोता है

सबको अपने गले लगा ले
सब तेरे हैं मन को समझा ले
क्या हक तेरा जिन्दगानी पे
जहरीले बीज क्यूँ बोता है
नमीं आँख में दिल रोता है।

सुरेश भारद्वाज निराश
धर्मशाला.हिप्र.