शीर्षक- हमसफ़र

आओ मेरे हमसफ़र

जीवन के बीते पलों में

फिर से मौज कर आएँ।

अंतिम पड़ावों से होकर

गुजरे दिनरातों की गणना

संग तुम्हारे कर आएँ।

जो अधूरी तमन्नाएँ हैं

दोनों देशों के पंछी हम

मिलकर पूरी कर आएँ।

बच्चों की खुशियों में हमने

जिन खुशियों को छोड़ा था

आओ उन्हें अब जी आएँ।

रीवा मध्य प्रदेश (कर्मभूमि)

जन्म भूमि इलाहाबाद

अध्यापक, कवि एवं लेखक।

—बृजेश पाण्डेय ‘बृजकिशोर’