तुमसे बिछुडने के बाद

तुमसे बिछुडने के बाद
वो सुगन्ध बिखर गई

तन्हाई कभी महसूस हुवा था
फिर से लौट आई

हंसी का चेहरा लिये घूमते थे
हंसी फिर रुक गई

तुमसे बिछुडने के बाद
आंखें फिर से नम हो गई

रातें जो चलती रहती थी
थम सी गई है

नग्मे संगीत का सुना करते थे
बहरे जैसे हो गये है

तुमसे बिछुड्ने के बाद
सांसों के धड़कन जैसे रुक गये हो

रास्ते जो कभी खुद खुला करते थे
अब दिखते नहीं

पत्थर जैसे चट्टान बन गये हो
मिट्टी रेगिस्तान बन गये जैसे

तुमसे बिछुडने के बाद
रिश्ते नाते जैसे बंद हो गये हो

राह चलते जो अपने हुवा करते थे
आज मतलब के जैसे बन गये

तुमसे बिछुडने के बाद
जैस संसार ही विलीन हो गया हो

मौलिक अप्रकाशित
राम भगत 9816832143

दर्द

दर्द अन्सुल्जी पहली है
कोई बढ़ाये
कोई सताये
कोई रूलाये
दर्द तो दर्द है
सभी को
है आज बहुत सताये
शाँत दिमाग
ठंडा दिमाग
इस दर्द को
कम करें

राम भगत किन्नौर
9418232143