पिता का साया/सुदेश दीक्षित

पिता दिवस पर

पिता का साया

पिता का साया गर जिंदगी मे नही होता ।

मिली जिंदगी मे खुशीयों में रंग नही होता ।।

बेनूर होती ज़िंदगी ,ज़िंदगी नही होती ।

बिन साये के जीने का ढंग नहीं होती ।।

कभी रोशनी नहीं होती ज़िंदगी में यारो ।

पिता ने हर पल किया ज़ंग नहीं होता ।।

वे रंग हो जाती दीवारें दिले मकां की ।

गर पिता ने इन्हें दिया रंग न होता ।।
सुदेश दीक्षित

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *