ऐसी माँ ज़हां मे / सुदेश दीक्षित

माँ

ऐसी माँ ज़हां मे भला कहां मिलती है ।
सुखों के धागे से बच्चों के दुःखों को सिलती है ।।

किसे है फुरसत उसके दुःखों को बांटने की ।
बच्चों को देख खुश वगिया उसकी खिलती है ।।
बहुत समेट कर रखा है दिल की पोटळी मे उसने ।
खोलना चाहो तो खुलती नहीं हिलती है ।।

फरिस्ता इक आया रात मिरे ख्वाव में ।
सुरत उसकी मिरी माँ से मिलती है ।।

मिलने को मिल जाती है हर चीज ज़हां मे ।
लौरी सुना ,सुलाने बाली माँ नहीं मिलती है ।।

तोलते नहीं कम,ज्यादा पलड़े ममता के “दीक्षित” ।
माँ सब कुछ सब को बरावर तोलती है ।।
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सुदेश दीक्षित
पंड़तेहड़ बैजनाथ
जिला कांगड़ा
हिमाचल प्रदेश

सुदेश दीक्षित

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