तुमसे बिछड़ कर/राम भगत नेगी

तुमसे बिछड़ कर

तुमसे बिछड़ कर
दुःख दर्द हो ऐसी कोई बात अब नहीं

दिल से रिश्ता जुड़ा है
तो दूरियां कैसी बिछ्ड्न कैसा

तुम्हें लगता है हम बिछड़ गये है
हम बिछडे कब हम तो जन्मों से एक है

सांसें मैरी यंहा चल रही है
पर दिल की धड़कन तो आपके पास धड़क रहा है

शब्द मुख से निकल रहे है
पर महसूस तो आपको हो रहा है

तुम कहीं भी हो मैं कहीं भी रहूँ
दिल जिस्म सांसें तो अभी भी साथ साथ है

जीओ ऐसे जुदाई महसूस ना हो
रहो ऐसे जैसे सदियों से साथ साथ हो

तुम मैं बनूँ मैं तुम बनूँ
पल भर भी बिछ्ड्न की दर्द ना बनूँ

आओ अब कुदरत की खेल को कबूल करें
तुम वहां मैं यंहा जीने की ज़िद करें

तुमसे बिछड़ कर
दुःख दर्द हो ऐसी कोई बात अब नहीं

राम भगत किन्नौर 9816832143

विकास ने रोका है

बढ़ते विकास ने रोका है
पर्यावरण की गति

जगह जगह सड़क भवन निर्माण ने
पहुंचाया है पैड पौधों को क्षति

बड़े बड़े उद्योग भी कसूरवार है
पर्यावरण पर चुप सभी सरकार है

आज गांव शहर के जनता को सोचना होगा
पर्यावरण पर मिल कर सबको कमर कसना होगा

सड़कों में चिल्ला कर कुछ नहीं होगा
विकास के साथ जंगलों को सुरक्षित करना होगा

बढ़ती आबादी घटती जंगल
कौन कसूरवार है बोल मंगल

जंगल से जीवन है पैड पौधे हमारी सांसें
जंगल लग्वाओ देवदार हो या बाँसे

मंदिर मस्जिद के चक्र कम करो
जंगल के ओर सब रुख करो

ना मंदिर देगा ना मस्जिद जंगल में पैड पौधे हम लगाये तो जीवन दान सब जीव को मिलेगा

राम भगत किन्नौर
9816832143

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