रात दिन आहें भर रहा हूँ मै/लक्ष्मण दावानी

रात दिन आहें भर रहा हूँ मै
याद बस तुम्हें कर रहा हूँ मै

हो रही खत्म ज़िन्दगी मेरी
रेत बनकर बिखर रहा हूँ मै

थम रही धीरेधीरे धड़कन भी
लम्हे लम्हे में मर रहा हूँ मै

छोड़कर साथ तुम गये जबसे
हर सफर दर – बदर रहा हूँ मै

भाग जाती है छोड़ कर खुशी
गर्दिशे वो बशर रहा हूँ मै

फिर मिलादे उसीसे खुदाअब
गम के सायों से डर रहा हूँ मै
( लक्ष्मण दावानी ✍ )

सुशील कुमार ने एक मिनट में दिलाया 14 वां गोल्ड

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *