“रावी”कलकल बहती ये रावीसबके मन को मोह लेती ये रावीसरगम के सुर छेड़ती ये रावीप्रेम रस का बोध करवाती ये रावीटेड़े मेढे संकरे रास्तों से गुजरती ये रावीअपनी ही धुन में मस्त रहती ये रावीसूर्य को आलिंगन करती ये रावीहिमालय की शोभा में चार चाँद लगाती ये रावीप्यासों की तृष्णा को बुझाती ये रावीजीवंतता की पहचान ये रावीउर्वरता और जीवन प्रदान करती ये रावीखुद कष्ट सहन कर हमारे कष्टों को सहती ये रावीअप्रितम सुखदायिनी ये रावीचम्बा की पहचान ये रावीसरहदों की लकीरो को मिटाती ये रावीबडा भंगाल से निकल पाकिस्तान पहुँचती ये रावीअजय कुमार