*रक्तबीज कोरोना*
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बाहर मंडराता *रक्तबीज कोरोना* का खतरा दु:खद है ।
घर ही बना है अब आसारा सुखद है ।।
बच्चों की मुस्कान सा,मंदिर सा लगता है अब घर धाम ।
घर में प्यार-दुलार है, सबकी सहमति से होते हैं सारे काम ।।
घर बैठे हैं खाली,काम धन्धे का है मीटर डाउन।
फैशन छूमंतर हो गया, फुल ड्यूटी है पाजामा और गाउन ।।
बंद हो गये सारे होटल मयखाने, ना कहीं चाट,ना कहीं मिठाई।
सब रूक गये सारे सैर सपाटे, बंद हो गई रेल-यात्रा हवाई।।
घर की दाल रोटी में रहो खुश,ये ही सबकी रसमलाई ।
सब खामोश हैं ये कैसी *रक्तबीज कोरोना* बीमारी आई
ना कोई इलाज, ना टीका, ना इसकी कोई दवाई ।
*रक्तबीज कोरोना* की महामारी दुनिया में कैसी आई।।
हाथों को धोयें बार बार, मुँह पर मास्क लगाना है ।
घर पर सुरक्षित रहकर,सोशल डिसटेन्स से कोरोना को भगाना है
ना इलाज इस बीमारी ने सबको कर रखा है हैरान ।
*रक्तबीज कोरोना* का मचा हाहाकार पूरी दुनिया है परेशान ।
लाॅकडाउन में समझनी है जिदंगी तो पिछे देखो ।
जान है तो जहान है, जीनी है जिदंगी तो आगे देखो ।।

(रामचन्द्र स्वामी अध्यापक बीकानेर)मो-9414510329